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वैदिक ज्योतिष के अनुसार - कुंडली में कई प्रकार के दोष बताये गए है इन्ही दोषो में एक दोष होता है, मांगलिक दोष जिसे मंगल दोष कुज दोष, भौम दोष भी कहते है। ये दोष जिस व्यक्ति की कुंडली में होता है वह मांगलिक कहलाता है
ये दोष तब बनता है जब किसी व्यक्ति की कुंडली के 1,4,7,9,12 भाव में मंगल हो।

ये दोष होने पर कन्या अपने पति के लिए तथा पति कन्या के लिए घातक होता है।मंगल दोष बड़ी समस्याएं देता है, ये व्यक्ति के जीवन को तहस-नहस कर देता है. वैवाहिक जीवन में एक व्यक्ति मंगली हो और दूसरा हो तो दूसरे की मृत्यु तक हो सकती है.इस दोष के करण ही आपकी शादी में विलम्ब होता है।

इसीलिए मांगलिक कुंडली का निर्णय बारिकी से किया जाना चाहिऐ .

80 % कुण्डलियो में मंगल 1,4,7,8 ,12 भाव में होता है जिसका अर्थ है की वह व्यक्ति मांगलिक है.
इनमे से 50% लोगो का दोष किसी किसी वजह से खतम हो जाता है
अधिकतर ज्योतिष आपकी कुंडली के लगन चार्ट में 1,4,7,8 ,12 भाव में मंगल को देखते है तो मांगलिक दोष बताते है 
अगर आपकी कुंडली के 7,8 भाव में मंगल हो तो आपको high मांगलिक और 
अगर 1,4,12 में मंगल हो तो वो आपको low मांगलिक बताते है
जिसकी बजह से लोग इस दोष को दूर करने के लिए उल्टे-सीधे उपाय करने लगते हैं, जिससे समस्याएं कम होने की बजाय कई गुना बढ़ जाती हैं.

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